प्यार भरी शायरी



इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया

वर्ना हम भी आदमी थे काम के
मिर्ज़ा ग़ालिब



रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

अहमद फ़राज़

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