No. Social Media
1. YouTube
2. Facebook
3. Twitter
4. Instagram

`x/y=1/2+1/2`

`=2/2`

`=1`

 

No.Social Media
1.YouTube
2.Facebook
3.Twitter
4.Instagram


11










No.Social Media
1.                                  

 

 

 

1

 

समाजशास्त्र: उत्पत्ति, परिभाषा,अध्ययन-क्षेत्र एवं प्रक्रति

[SOCIOLOGYAND OTHER SOCIAL SCIENCES]

समाजशास्त्र क्या है ? यह प्रश्न वर्तमान सामाजिक विचारकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम सदियों से समाज में और विभिन्न समूहों में रहते चले आये हैं; हमारे व्यवहार का प्रत्येक पक्ष किसी-न-किसी सामाजिक नियम से प्रभावित होता रहा है तथा हजारों वर्ष पहले से लेकर आज तक धर्मशास्त्री, दार्शनिक और विचार समजीक जीवन के विषय मे कुछ-न-कुछ विचार भी प्रस्तुत करते रहे हैं, लेकिन समाज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास सर्वप्रथम 19वीं शताब्दी में आगस्त काम्ट (August Comte) ने किया। इस दृष्टीकोण से दूसरे सामाजिक विज्ञानों की तुलना में समाजशास्त्र एक नया विज्ञान है। एक नया विज्ञान होने के कारण समाजशास्त्र की प्रकृति तथा विषय-वस्तु के सम्बन्ध में भी अनेक भ्रम उत्पन्न हो गये हैं। कुछ व्यक्ति यह समझते हैं कि समाजशास्त्र सभी दूसरे सामाजिक विज्ञानों का मिश्रण है; कुछ का विचार है कि मानव-जीवन के छोटे-से-छोटे प्रत्येक पक्ष का अध्ययन करना समाजशास्त्र का कार्य है, जबकि कुछ व्यक्ति यहाँ तक समझ लेते हैं की समाजशास्त्र केवल विवाह तथा परिवार का अध्ययन होने के कारण एक मनोरंजक विषय है। इस कारण कोई भी व्यक्ति, जो सामाजिक जीवन के किसी भी पक्ष पर कुछ बातें कर लेता है, स्वयं को एक समाजशास्त्री कहने का भी दावा करने लगता है। वास्तविकता यह है कि एक विज्ञान के रूप में प्रत्येक विषय का अपना एक प्रथक दृष्टिकोण होता है तथा उसका एक प्रथक अध्ययन-क्षेत्र होता है। इस प्रकार समाज अथवा समजीक जीवन के किसी पहलू पर साधारण विचार-विमर्श करने वाला व्यक्ति ‘सामाजिक’ हो सकता है, लेकिन ‘समाजशास्त्री’ नहीं एक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र के अर्थ और प्रक्रर्ति को समझने के लिए आवश्यक है कि सर्वप्रथम हम यह समझने का प्रयत्न करें कि एक नए सामाजिक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र की उत्पात्ति किस प्रकार हुयी?

समाजशास्त्र की उत्पत्ति (ORIGIN OF SOCIOLOGY)  

मारिस गिनसबर्ग ने लिखा है, “मोटे तौर पर कहा जा सकता है की समाजशास्त्र की उत्पत्ति राजनीतिक दर्शन, इतिहास, विकाश के प्राणिशास्त्रीय सिद्धान्तों तथा सुधार के लिए होने वाले उन सभी समजीक और राजनीतिक आंदोलनों पार आधारित है जिन्होंने समजीक दशाओं का सर्वेक्षण करना आवश्यक समझा वास्तविकता” यह है की समाजशास्त्र का व्यावहारिक रूप उतना ही प्राचीन है जितना कि स्वयं समाज का। इसके बाद भी आज हम जिस दृष्टिकोण के आधार पर समाजशास्त्र को समझने और विकसित 
2.Facebook
3.Twitter
4.Instagram